घंटाघर पर रंगोली व दीपदान, मिश्री-नीम प्रसाद बांटकर दी नवसंवत्सर की शुभकामनाएं
केकड़ी, 19 मार्च। भारतीय संस्कृति एवं परंपराओं के प्रति गहरी आस्था का परिचय देते हुए भारत विकास परिषद शाखा केकड़ी द्वारा भारतीय नववर्ष (विक्रम संवत 2083) का स्वागत हर्षोल्लास एवं उत्साह के साथ किया गया। इस अवसर पर परिषद के सदस्यों ने शहरवासियों का तिलक कर मिश्री, काली मिर्च एवं नीम की कोपलों का पारंपरिक प्रसाद वितरित कर नववर्ष की शुभकामनाएं दीं।

नव संवत्सर प्रभारी बंसीलाल जांगिड़ एवं भंवरलाल बज ने बताया कि सनातन संस्कृति के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नववर्ष का शुभारंभ होता है। इसी क्रम में पूर्व संध्या पर केकड़ी के घंटाघर चौराहे पर सायं 6 बजे आकर्षक रंग-बिरंगी रंगोली सजाई गई तथा सामूहिक रूप से दीप प्रज्वलित कर दीपदान किया गया, जिससे वातावरण भक्तिमय हो उठा।
गुरुवार सुबह 8 बजे परिषद के सदस्य घंटाघर चौराहे पर एकत्रित हुए और राहगीरों का तिलक कर उनका अभिनंदन किया। साथ ही पारंपरिक रूप से मिश्री, काली मिर्च एवं नीम का मिश्रण प्रसाद स्वरूप वितरित कर सभी के सुख, समृद्धि एवं स्वास्थ्य की कामना की।
परिषद के सचिव रामनिवास जैन ने बताया कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का विशेष धार्मिक महत्व है। इसी दिन से नवरात्रि का शुभारंभ होता है और देवी शक्तियों की आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन ब्रह्मा जी द्वारा सृष्टि की रचना, भगवान श्रीराम का राज्याभिषेक, महाराजा विक्रमादित्य द्वारा विक्रम संवत की स्थापना, महर्षि दयानंद सरस्वती द्वारा आर्य समाज की स्थापना एवं झूलेलाल जी का जन्मोत्सव जैसे अनेक ऐतिहासिक प्रसंग जुड़े हैं।
कार्यक्रम में शाखा अध्यक्ष बहादुर सिंह शक्तावत, कोषाध्यक्ष हीरालाल सामरिया, भगवान महेश्वरी, श्यामसुंदर विजय, राकेश महेश्वरी, सूर्यप्रकाश विजय, सर्वेश विजय, कैलाशचंद जैन, विष्णु प्रसाद साहू, संरक्षक रामनरेश विजय, मुकेश नुहाल, पुरुषोत्तम काबरा, श्याम महेश्वरी, लोकेश शास्त्री, कमल किशोर विजय, शिव बियानी, राजेश विजय सहित महिला प्रमुख अंजू विजय, ममता विजय, राधा माहेश्वरी, आभा बैली, शांता महेश्वरी, मंजू महेश्वरी, सुमन जैन, अरुणा माहेश्वरी, सविता विजय एवं सरिता विजय सहित बड़ी संख्या में सदस्य उपस्थित रहे।
मीडिया प्रभारी दिनेश वैष्णव ने बताया कि इस आयोजन के माध्यम से समाज में भारतीय संस्कृति, परंपरा एवं आपसी भाईचारे का संदेश दिया गया, जिसे नागरिकों ने भी उत्साहपूर्वक स्वीकार किया।
