27 वर्षों बाद मिला न्याय: राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के निर्देश पर वाल्मीकि परिवार को मिला खातेदारी भूमि का कब्जा

देवली (टोंक), 25 फरवरी 2026।

ग्राम थांवला, तहसील देवली (जिला टोंक) में अनुसूचित जाति के वाल्मीकि परिवार को उनकी खातेदारी कृषि भूमि पर प्रशासन द्वारा विधिसम्मत कब्जा दिलाया गया। यह कार्रवाई राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के निर्देशों की पालना में की गई, जिससे 27 वर्षों से लंबित विवाद का समाधान संभव हो सका।

प्राप्त जानकारी के अनुसार रामपाल वाल्मीकि की खातेदारी भूमि खाता संख्या 3383/105, रकबा 1.25 हेक्टेयर पर ग्राम पंचायत थांवला के एक प्रभावशाली परिवार द्वारा लगभग 27 वर्षों से अवैध कब्जा किया गया था। पीड़ित परिवार द्वारा लगातार न्याय की गुहार लगाए जाने के बाद मामला आयोग तक पहुंचा, जिस पर गंभीरता से संज्ञान लिया गया।

आयोग के आदेशानुसार देवली तहसील प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तहसीलदार के नेतृत्व में नायब तहसीलदार, गिरदावर व पटवारी सहित राजस्व टीम की मौजूदगी में भूमि का विधिवत सीमांकन कराया। सीमांकन प्रक्रिया राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम की धारा 183-बी के प्रावधानों के अनुरूप संपन्न की गई।

इसके उपरांत प्रशासन ने जेसीबी मशीन की सहायता से अवैध अतिक्रमण हटवाकर प्रार्थी रमेश वाल्मीकि, सत्यनारायण वाल्मीकि एवं उनके परिजनों को उनकी पुश्तैनी कृषि भूमि का पुनः कब्जा दिलाया।

यह कार्रवाई अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की भावना के अनुरूप सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

इस अवसर पर अम्बेडकर वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष जितेन्द्र बोयत, सचिव एडवोकेट मुकेश धवलपुरिया सहित अनुसूचित जाति समाज के गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे। दिल्ली स्तर पर भी प्रकरण की पैरवी में सहयोग प्रदान किया गया।

अम्बेडकर वेलफेयर सोसायटी ने प्रशासन एवं राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह कार्रवाई न केवल एक गरीब परिवार के अधिकारों की बहाली है, बल्कि समाज में विधि के शासन और सामाजिक न्याय की स्थापना का सशक्त उदाहरण भी है।

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