अजमेर | रविवार
हिन्द की सांस्कृतिक विरासत एक सक्रिय विद्वत मंच है, जहां देश के विभिन्न राज्यों से इतिहासकार, कला, संस्कृति एवं पुरातत्व विशेषज्ञ तथा शोधार्थी भारतीय संस्कृति के विविध आयामों पर संवाद, शोध साझा एवं मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
इसी क्रम में समूह के तत्वावधान में पुरातत्व, इतिहास, कला, संस्कृति एवं स्थानीय विरासतों के परिचय, संरक्षण, संवर्धन एवं नवीन शोध की संभावनाओं पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन रविवार 4 जनवरी 2026 को जिला मुख्यालय अजमेर स्थित उम्मेद अभय धर्मशाला ट्रस्ट (लोढ़ा धर्मशाला) में किया गया।

राष्ट्रीय सेमिनार की संयोजक समिति की सदस्या एवं केकड़ी निवासी पुष्पा शर्मा केकड़ी क्षेत्र के पुरावैभव के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने केकड़ी क्षेत्र के अल्पज्ञात ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक स्थलों पर अपना शोध-पत्र प्रस्तुत किया। वहीं केकड़ी की डॉ. अदिति गौड़, जो वर्तमान में गोविंद गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय, बाँसवाड़ा में कार्यरत हैं, ने वागड़ के सोमनाथ मंदिर के शिल्प सौंदर्य पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. सत्यनारायण समदानी (संस्थापक एवं संपादक, मीरा स्मृति संस्थान / मीरायन शोध पत्रिका, चित्तौड़गढ़) रहे। अध्यक्षता धर्मजीत कौर (अधीक्षक तकनीकी, राजस्थान पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग, जयपुर) ने की।
विशिष्ट अतिथि के रूप में देश के ख्यातनाम पुराविज्ञ डॉ. नारायण व्यास (भोपाल), डॉ. आर.सी. ठाकुर (निदेशक, अश्विनी मुद्रा शोध संस्थान, महिदपुर-उज्जैन), डॉ. धुवेन्द्र सिंह जोधा (शोध अधिकारी, वाकणकर पुरातत्व शोध संस्थान, भोपाल) तथा डॉ. बलविन्दर सिंह गिल (कोटा) उपस्थित रहे।
एक दिवसीय इस राष्ट्रीय सेमिनार में देशभर से आए विद्वानों एवं शोधार्थियों द्वारा 23 शोध-पत्रों का पी.पी.टी. के माध्यम से संक्षिप्त एवं तथ्यपरक प्रस्तुतीकरण किया गया, जिससे भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जुड़े नए शोध आयाम सामने आए।
