केकड़ी । वर्तमान केंद्रीय बजट मे गरीब तबके के लिए कुछ भी नया अध्याय जोड़ने का प्रयास नहीं किया गया | बजट में महंगाई को कंट्रोल करने के लिए भी कोई कदम नहीं उठाए गए हैं
तथा इकॉनमिक सर्वे दिखाता है कि व्यापार में अनिश्चितता भारत के लिए एक बड़ी चुनौती है, लेकिन बजट इस समस्या को मुश्किल से ही स्वीकार कर रहा है
आज डॉलर के मुकाबले रुपया का स्थर निरंतर गिर रहा है रूपये को मजबूत करने की कोई ठोस योजना नहीं है। भारतीय अर्थव्यवस्था का मूल संकट ठहरा हुआ वेतन, कमजोर उपभोक्ता मांग और निजी निवेश में सुस्ती है, लेकिन बजट में उपभोक्ता मांग को गति देने का कोई विचार नहीं दिखता है देश के युवाओ को शिक्षा और रोजगार चाहिए, इस बजट में शिक्षित युवाओं में फैले व्यापक बेरोजगारी संकट के समाधान से जुड़ी कोई बात नहीं है
कुछ राज्य सरकार बहुत ही गंभीर वित्तीय दबाव में हैं इस हेतु कोई राहत नहीं दिख रही हैं इसके साथ ही SC-ST, पिछड़े वर्ग, EWS या अल्पसंख्यकों के लिए किसी प्रकार की सहायता का प्रावधान नहीं किया गया है
पिछले साल के आवंटित बजट मे आज भी शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र मे पूरा बजट खर्च नहीं किया हैं
पहले की सरकारें शिक्षा, स्वास्थ्य और छात्रों को स्कॉलरशिप पर ज्यादा जोर देती थीं। वित्त मंत्री ने एक भी बार स्कूलों का जिक्र नहीं किया और सामाजिक सुरक्षा और कल्याण को लेकर एक भी घोषणा नहीं की। इसके अलावा, मनरेगा की जगह आए नए कानून का बजट में कोई जिक्र नहीं किया गया |
हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष मालिकार्जुन खरगे ने ठीक ही कहा हैं कि ये एक थकी हुई और रिटायर हो चुकी सरकार का बजट है। पहले तो ये पैसा नहीं देना चाहते और ऊपर से मिले बजट को भी खर्च नहीं करते हैं
बजट की विफलता का अंदाजा शेयर मार्केट की स्थिति से लगाया जा सकता हैं| हर क्षेत्र में यह सरकार विफल हो चुकी है। यह बजट गरीबों, युवाओं के हित में नहीं है। महंगाई कैसे कम होगी, रोजगार कैसे पैदा होंगे, इसका कोई उल्लेख नहीं किया गया है
