जल संरक्षण की दिशा में निरंकारी मिशन का सशक्त कदम: ‘प्रोजेक्ट अमृत’ का चौथा चरण — 1500 से अधिक स्थानों पर जलाशयों की सफाई, केकड़ी में पोकी नाड़ी का होगा शुद्धिकरण

केकड़ी, 19 फरवरी 2026।

जब सेवा साधना बन जाए और प्रकृति के प्रति संवेदना जीवन का मूल मंत्र हो, तब पावन संकल्प जन्म लेते हैं। मानव सेवा और लोककल्याण की इसी दिव्य चेतना को साकार रूप देने हेतु संत निरंकारी मिशन द्वारा ‘प्रोजेक्ट अमृत’ के अंतर्गत ‘स्वच्छ जल, स्वच्छ मन’ अभियान के चौथे चरण का भव्य आयोजन रविवार, 22 फरवरी 2026 को प्रातः 8 बजे से 11 बजे तक, सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के पावन मार्गदर्शन में, समस्त भारत में एक साथ किया जा रहा है।

संत निरंकारी मंडल के सचिव आदरणीय श्री जोगिंदर सुखीजा जी ने जानकारी दी कि यह विशाल अभियान देशभर के 1500 से अधिक स्थानों पर एकसाथ आयोजित होगा, जिससे जल संरक्षण और स्वच्छता का संदेश समाज के प्रत्येक वर्ग तक प्रभावी रूप से पहुँचेगा। यह प्रयास अपने व्यापक स्वरूप के कारण ऐतिहासिक महत्व रखता है।

केकड़ी ब्रांच के मुखी श्री अशोक कुमार रंगवानी ने बताया कि बाबा हरदेव सिंह जी महाराज की जन्म जयंती के शुभ अवसर पर, केकड़ी ब्रांच की साध संगत एवं सेवादल द्वारा जयपुर रोड स्थित पोकी नाड़ी की सफाई 22 फरवरी 2026 को प्रातः 8 से 11 बजे तक की जाएगी।

इस पहल का मूल उद्देश्य समाज में यह अनुभूति जगाना है कि जल केवल संसाधन नहीं, बल्कि जीवन का आधार और ईश्वर की अमूल्य देन है—जिसकी रक्षा करना प्रत्येक मानव का नैतिक दायित्व है। संत निरंकारी मिशन ने बाबा हरदेव सिंह जी की प्रेरणादायी शिक्षाओं को आत्मसात करते हुए वर्ष 2023 में संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से ‘प्रोजेक्ट अमृत’ का सूत्रपात किया था। यह पुनीत पहल जल संरक्षण को किसी एक दिवस तक सीमित न रखकर उसे जीवनशैली, संस्कार और सेवा-भाव के रूप में अपनाने की प्रेरणा देती है, ताकि स्वच्छ जल से स्वच्छ मन और स्वच्छ समाज का निर्माण हो सके।

नदियों, झीलों, तालाबों, कुओं एवं झरनों जैसे प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण हेतु समर्पित यह जनआंदोलन अपने प्रथम तीन चरणों में सेवा, समर्पण और सहभागिता की अनुपम मिसाल प्रस्तुत कर चुका है। इन्हीं उपलब्धियों से प्रेरित होकर चौथे चरण को और अधिक विस्तृत, संगठित और दूरदर्शी दृष्टिकोण के साथ क्रियान्वित किया जा रहा है, जिससे प्रकृति के प्रति जागरूकता और सामूहिक सहभागिता की सुदृढ़ चेतना विकसित हो।

गीतों की मधुर प्रस्तुतियाँ, सामूहिक गान, जागरूकता संगोष्ठियाँ और सोशल मीडिया अभियानों के माध्यम से जलजनित रोगों व स्वच्छता के महत्व पर जनचेतना को प्रोत्साहित किया जा रहा है। यह पहल स्मरण कराती है कि मन निर्मल होगा तो प्रकृति स्वच्छ होगी, और सेवा में समर्पण जुड़ते ही समाज का नव-निर्माण संभव है।

सतगुरु माता जी का संदेश सदैव यही रहा है कि हम इस धरती को आने वाली पीढ़ियों के लिए पहले से अधिक सुंदर, स्वच्छ और संतुलित रूप में संजोकर रखें। ‘स्वच्छ जल, स्वच्छ मन’ अभियान उसी पावन संकल्प का सजीव प्रतीक है, जो मानव को प्रकृति, समाज और आत्मा से जोड़ते हुए करुणा, संतुलन और सौहार्द से परिपूर्ण भविष्य की ओर मार्गदर्शन करता है।

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